Monday, November 18, 2019

Solar Energy in Hindi Information-(सौर ऊर्जा)

हेलो दोस्तों इस Post में आप जानेगे की What is Solar Energy in Hindi (सौर ऊर्जा). एवं सौर ऊर्जा और सोलर पैनल से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी। 


solar energy in hindi (सौर ऊर्जा)



Solar Energy in Hindi (सौर ऊर्जा)

हमारे देश में लगभग 75 प्रतिशत विधुत का उत्पादन थर्मल प्लांट से होता है। धीरे -धीरे कोयले की मात्रा में होने वाली कमी से विधुत के उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है इसका सीधा असर उपभोक्ता पर पड़ता है। 

साथ -साथ इससे हमारे पर्यावरण में प्रदूषण भी बढ़ रहा है क्योकि थर्मल प्लांट से सर्वाधिक मात्रा में SO का निष्काषन होता है जो अम्ल वर्षा के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी है। 

हमें प्रकृति में एक और ऊर्जा का स्रोत मिला हुआ जो की कभी भी ख़त्म नहीं होने वाला वह है सूर्य। 

इससे आने वाली विकिरण को हम विधुत ऊर्जा में बदल सकते है। यह पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है। 

सूर्य की ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदलना ही सौर ऊर्जा कहलाता है। यह Renewable Energy Source है। 

सौर ऊर्जा द्वारा विधुत उत्पादन के लिए PV Cell(Photovoltaic Cell), Inverter, Battery की आवश्यकता होती है। 

इसमें सूर्य से आने वाली ऊर्जा PV-Cell पर पड़ती है यह PV Cell 'Silicon' की बनी होती है, जो सूर्य की ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदलती है पर विधुत ऊर्जा DC प्रकार की होती है अतः इसे AC में बदलने के लिए Inverter और इसे Store करने के लिए Battery की आवश्यकता होती है।


Solar Panel (सोलर पैनल)

सोलर पैनल सूर्य की ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदलता है। इसमें छोटे -छोटे सिलिकॉन धातु के बने सेल होते है जिन्हे सोलर सेल कहा जाता है। 

सोलर पैनल तीन प्रकार के होते है -
  1. मोनोक्रिस्टलाइन (MonoCrystalline)
  2. पॉलीक्रिस्टलाइन (PolyCrystalline)
  3. थीन-फिल्म (Thin Flim) 

(1) मनोक्रिस्टलाइन 

इस प्रकार के सोलर पैनल का रंग काला होता है। यह कम धूप में भी काम कर सकते है। इनमे शुद्ध सिलिकॉन का प्रयोग किया जाता है तथा यह महगें भी होते है। 

Monocrystalline solar panel


 (2) पॉलीक्रिस्टलाइन

इनका रंग नीला होता है। इनमे अशुद्ध सिलिकॉन मिलाया जाता है तथा यह सस्ते होते है। यह खराब मौसम व कम धूप में काम नहीं कर पाते है। इनका प्रयोग रेगिस्तान वाले क्षेत्र में और ज्यादा धूप वाले स्थानों पर किया जाता है। 

Polycrystalline solar panel

     

(3) थीन फिल्म

इस प्रकार के पैनल पतले होते है इन्हे मोड़ा जा सकता है। यह 300 -350 गुना छोटे होते है। 

इन्हे इनमे प्रयोग किये जाने वाले पर्दाथ के अनुसार विभाजित किया जाता है-  
  1. Amor Phous Silicon (A -Si)
  2. Copper Indium Gallium Selenide (CIGS)
  3. Cadmium Telluride (Cd -Te)
  4. Gallium Arsenide (Ga -As)
इसकी दक्षता लगभग 28.8 प्रतिशत होती है। यह लचीला और कम वजनदार होता है। इनका उपयोग अधिकांशतः बड़े संस्थानों में बड़ी छतो तथा Commercial Building में प्रयोग होता है। 

Thin flim solar panel

कार्यप्रणाली 

सोलर पैनल छोटे-छोटे सोलर सैलो से मिलकर बना होता है। इनमे साधारणतः सिलिकॉन धातु का प्रयोग करते है, यह एक अर्द्धचालक धातु है। 

इसमें दो टाइप होते है P और N, इसमें P का अर्थ धनात्मक (Positive)और N का अर्थ ऋणात्मक (Negative) होता है। इन दोनों को एक साथ रखा जाता है। 

सूर्य से आने वाली ऊर्जा जिसमे कई प्रकार के छोटे-छोटे कण पाए जाते है, जिन्हे फोटोन कहते है।  यह जब इन अर्धचालको पर पड़ते है तो इलेक्ट्रान धनात्मक(P) से ऋणात्मक(N) की ओर बहने लगते है। इससे धारा (Current) बनती है, यह धार DC प्रकार की होती है। 

सोलर सिस्टम के प्रकार     

  1. On Grid System 
  2. Off Grid System 
  3. Hybrid System 

(1) On-Grid  

इसमें किसी भी प्रकार की Power को Battery द्वारा जितनी बिजली उत्पादित होती है उसे ही हम उपयोग कर सकते है। 

माना हमारे घर का लोड 300 वॉट है तथा सोलर द्वारा उत्पादित बिजली 500 वॉट है, तो हमारे द्वारा केवल 300 वॉट का ही उपयोग किया जाता है तथा शेष 200 वॉट विधुत विभाग के पास चली जाती है तथा हमारे बिजली के बिल में उसे समायोजित कर दिया जाता है। 

On Grid System के लिए हमें सोलर पैनल MCB, Junction Box, Inverter और Bidirectional Meter की आवश्यकता होती है। 

इस प्रकार के सिस्टम का उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहाँ पर बिजली कम समय के लिए जाती है या नहीं जाती है, क्योकि बिजली जाने के बाद यह सिस्टम काम करना बंद कर देता है। 
on Grid solar system
On Grid Solar System


(2) Off Grid System

यह उन जगहों के लिए अच्छा रहता है जहाँ बिजली कम समय के लिए आती है।

Solar Panel से Solar Inverter को Connect किया जाता है अगर हम Normal Inverter का उपयोग करते है तो Solar Panel के बाद MPPT Solar Controller लगया  जाता है। तथा Power Store करने के लिए Battery लगायी जाती है।  

माना हमारा सोलर पैनल 1000 वॉट बिजली का उत्पादन करता है तथा हमारा लोड 700 वॉट है तो यह 700 वॉट सोलर पैनल से लेगा तथा बाकि 300 वॉट से बैटरी को चार्ज करेगा इस Case में Main Supply Disconnect रहती है। 

अगर हमारा सोलर पैनल 1000 वॉट का उत्पादन करता है तथा हमारा लोड 1500 वॉट है तो यह 1000 वॉट सोलर पैनल से लेगा तथा 500 वॉट Main Supply से लेगा और बैटरी को भी चार्ज Main Supply से करेगा। 
off grid solar system
Off Grid Solar System

(3) हाइब्रिड सोलर सिस्टम  

यह On Grid व Off Grid सिस्टम का मिश्रित रुप होता है। इसमें बिजली सर्कार को बेचने के साथ-साथ उससे बैटरी बैकअप भी लिया जाता है। 

यह पॉवर कट के समय भी काम करता है यह एक Automatic System होता है। इसमें आपके पास जितना लोड है उसे आप पैनल से चलाते है इसके बाद बची हुई बिजली से बैटरी चार्ज करते है यदि उसके बाद भी अगर बिजली बच जाती है तो उसे सरकार को बेच दी जाती है। 

यह सिस्टम महंगे होते है क्योकि इसमें पॉवर स्टोर करने के लिए बैटरी की आवश्यकता होती है। 
Hybrid solar system
Hybrid Solar System


सौर ऊर्जा के उपयोग 

सौर ऊर्जा का उपयोग आज लगभग हर क्षेत्र में होता है जैसे -
  1. पानी गर्म करने में 
  2. खाना पकाने में 
  3. विधुत ऊर्जा के उत्पादन में 
  4. अन्तरिक्ष स्टेशनो में 

सोलर वाटर हीटर 

इसका उपयोग पानी  के लिए किया जाता है। इसमें सूर्य से आने वाली ऊर्जा से पानी को गर्म करके संचित किया जाता है। इसमें बिजली आपूर्ति की आवश्यकता नहीं होती है। इसके द्वारा लगभग 100 से 1250 यूनिट की प्रतिवर्ष बचत की जा सकती है। 

सोलर कूकर  

इसका उपयोग सूर्य की ऊर्जा द्वारा खाना पकाने में किया जाता है। इसके द्वारा खाना पकाने में किसी भी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। अथार्त पर्यावरण में कार्बन की मात्रा में कमी होती है और प्रदूषण भी कम होता है। सोलर कूकर में बने भोजन में सभी प्रकार के पोषक तत्व उपस्थित रहते है। 

सौर ऊर्जा के लाभ 

  1. यह ऊर्जा का कभी भी ख़त्म न होने वाला संसाधन है। 
  2. सोलर ऊर्जा का उपयोग करके हम हमारे बिजली के बिल को कम कर सकते है। 
  3. सोलर सिस्टम के लिए रख  रखाव सस्ता होता है तथा इसमें सोलर प्लेटो की सफाई भी आसान होती है। 
  4. इसमें कोई ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। 
  5. सोर ऊर्जा द्वारा किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता है।

सौर ऊर्जा की हानियाँ    

  1. सोलर सिस्टम में सोलर पैनल, इन्वर्टर, बैटरी, चार्ज कंट्रोलर, वायरिंग आदि का उपयोग किया जाता है इसलिए इसकी प्रारंभिक लगत अधिक आती है। 
  2. वातावरण के ख़राब होने पर विधुत के उत्पादन में कमी हो जाती है। 
  3. सोलर सिस्टम को लगाने के लिए अधिक जगह की आवश्यकता होती है। 
  4. इसकी प्लेटो को हर माह साफ़ करना पड़ता है क्योकि इन पर धूल जमने से इनकी दक्षता में कमी आती है। 

निष्कर्ष 

आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या विश्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।  इसका प्रमुख कारण है पेड़ो की कटाई और कारखानों से निकलता धुआँ है। आज हमारे घरो में जो बिजली का उपयोग किया जाता है उनका उत्पादन थर्मल प्लांट, डीजल प्लांट, नुयाक्लियर प्लांट आदि द्वारा किया जाता है, इनसे निकलने वाले धुँए से वायु व जल प्रदूषण होता है इसलिए इनके उपयोग को कम करने के लिए ऊर्जा के नवीकरणीय (Renewable) स्रोतों का प्रयोग करना चहिए जैसे- सौर ऊर्जा, बयोगेस, पवन चक्की आदि। यह पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते है तथा यह कभी भी समाप्त न होने वाली ऊर्जा है।                                                                                         

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